आजु के जबाना मा सगरव संसार एक बहुत बड़े भरम मा पड़ा बाय. सबके लगे खाय के कमी नाही अहै लेकिन तब्बव कहा जात बाय कि सगरव संसार मा आर्थिक मंदी छाई अहै. येहके पीछे कवनव न कवनव बतकही जरूरै अहै. चहै ऊ अमरीका हुवे अउर चहै भारत. अब ई बात हमरे हिसाब से ठीक नाही जनाय पडत कि एक आम मनई का दुई जून कई रोटी अउर अपने हिसाब से सायकिल मोटर सायकिल या फिर एकाध ठू कार से काम चली जात है तव वोहमा बहुत पैसा खर्चा कइके लक्जरी के पिछवा बर्बादी करय कई कवन जरूरत अहै. का ओहसे ४०० साल ज़िंदा रहै कै जुगाढ़ है जाये अउर जव ८० से १०० साल कि जिन्दगी मा खाली आपन खोंधा भरेव केहू अउर की तायीं कुछू नाही किहव तव झूटी शान देखाए कवन फायदा. आपन झूठी शान का बचावे कि तायीं दुसरे के ऊपर बोझ कहे डरा चाहत हव. अरे भईया बड़का साहब बनी जाबो तव काव करबो. चार ठू चपरासी का परेशान करबो. वे भले मुह पै ना कहे लेकिन उनके बाल बच्चा उठत बैठत मन मा जरूर गरियेहई. मंत्री बनी जाबो तव लूट मार मचव्बो जैसे आज कल के नेता लोगे करत है. अकेल ज़िव बचावे कि तायीं सैकडन सुरक्षा वाले वोह्के पीछे हजारन चमचा का तुहका नाही पता अहै कि वे तोहरे पीछे मुफ्त मा नाही घूमते. अरे भईया एक दिन तव मरयिन का अहै काहे येतना बर्बादी करत हव. लेकिन भईया चाहे हम अवधी मा लिखी या अंगरेजी मा. यहि संसार के मनयीं के काने पै जुवां नाही रेंग सकत. तव चाहे आर्थिक मंदी झेलव या फिरि परलय. मर्जी तोहर. कैहव न कैहव सबकै नंबर जरूर लागे. – राज

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