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“भ्रष्टाचार का शिष्टाचार”

भ्रष्ट हुई अब बोली भाषा भ्रष्ट हुए अब लोग.
ना जाने किस बात का बना आज संजोग.
भ्रष्टाचार के शिष्टाचार में कविता आज सुनाता हूँ.
नेताओं और अभिनेताओं के नाम सभी बतलाता हूँ.
भ्रष्टाचार की जीत हे भाई भ्रष्टाचार की जीत
एक बार आज़ाद हिंद में भई फिर भ्रष्टाचार की जीत.

बात करूँ सन सत्तावन की देश की थी आजादी.
भ्रष्ट हुए कुछ नेताओं ने किया देश बर्बादी.
किया हिंद से भाग अलग और पकिस्तान बनाया.
ना जाने कितने मासूमों ने अपनी जान गवाया.
नहीं रही परवाह किसी की चलने लगी नयी राजनीत
एक बार आज़ाद हिंद में भई फिर भ्रष्टाचार की जीत.

समय चक्र फिर रहा घूमता आया नया नया परिवेश
जान से मार दिया शास्त्री को जब यात्रा करने गए विदेश.
ले कुर्सी फिर इन्द्रा रानी अपनी लगी करन मनमानी.
दिया कटा नस सब पुरुषों की बतलाया जिसको नादानी.
लगी पटखनी गिरी ढुनमुनी गावन लागी गीत.
एक बार आज़ाद हिंद में भई फिर भ्रष्टाचार की जीत.

हिंद की जनता रही बेचारी किया नेक एक काम.
देख के आंसू राजीव जी के हिंद की दिया लगाम.
भारत वर्ष की रक्षा खातिर लिया तोप बोफोर्स.
खूब बनाया बुद्धू हमको लगा के अपना सोर्स
जांच नहीं पूरी हो पाई गयी जिंदगी बीत.
एक बार आज़ाद हिंद में भई फिर भ्रष्टाचार की जीत

हरे मुरारी अटल बिहारी लेकर आये एक बीमारी.
किया विकास आय टी युग का खुद तो बने रहे ब्रह्मचारी.
सारी दुनिया लिए मोबाईल सायकिल पर मारे स्टाईल
कही कही कम्प्यूटर बाबा लगे निकालन सबका खाता
दिया हवाला स्विस बैंक का बाबा भी गए पीट.
एक बार आज़ाद हिंद में भई फिर भ्रष्टाचार की जीत

एक बार आज़ाद हिंद में भई फिर भ्रष्टाचार की जीत
बार बार आज़ाद हिंद में भई यारों भ्रष्टाचार की जीत .

                                                           राज शुक्ल  ….

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