“दीपावली २०११ और भारतीयों की व्यथा”

किस बात की है ये दीवाली, किस बात की है ये खुशहाली.

इस लूट के गोरखधंधे में एक राज आज बतलाऊँगा
बच रहो मिठाई खाने से पानी से काम चलाऊंगा
इस राज को राज ही रहने दो सुनने न पाए घरवाली
किस बात की है ये दीवाली, किस बात की है ये खुशहाली.

ये राज मिलावट राज का है गजराज का है युवराज है
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण हर जनता की आवाज का है.
नेता भर कर झोली खाली सब जन को करते कंगाली
किस बात की है ये दीवाली, किस बात की है ये खुशहाली.

This slideshow requires JavaScript.

Happy Deepawali….. Take Care…

—– राज शुक्ल

Advertisements