अवध एक नए युग का आरम्भ —-

बिना अवध के विकास भये यहि भारत बर्ष कय विकास नाही होय सकत है. चाहै लोगन कै विकास होय या बोली भाषा कै. अवधी एक रसीली, रंगीली व हठीली बोली यहि नवके जुग मा एक पेंच के रूप मा काम करत है. चाहे कव्नाव नेता होय या अभिनेता बिना अवधी बोले उनके भला नहीं होय सकत. अगर उदाहरण के तौर पे देखा जाय तव आजु के महानायक अमित भैया यानि की अमिताभ बच्चन का देखा जाय. इनका जवान मान सम्मान बड़ा बाय वोह्के सबसे बड़ा कारन ई उनके अवधी बोलाबव बा. जवने सलीमा मा आपन डायलाग अवधी मा बोलीं है ऊ जरूरे हिट होय गे अहै. इहे नहीं औरव सलीमा येही कारन बहुतै चला. राजनीति क्षेत्र मा देखा जाय तव चाहे वे जवाहर लाल हुवें या फिर अटल बिहारी बाजपेयी, लाल बहादुर शास्त्री हुवे या श्रीमती इंदिरा गाँधी. इनके बोली भाषा इनके सफल हुवे के कारन बनी. आज और नेता लोगे केतनव कोशिश के लेत अहै लेकिन वहि मुकाम पे बिना अवधी के न पहुच पयिहय. जेतना चक्कर राहुल लगावत अहै उत्तर परदेश मा वतना तव बहुत जादा रहा यहि मुकाम पे पहुँचावे की ताईं. आजु जब बात क्षेत्रवाद के उत्तर प्रदेश मा चालत अहै तव हम यहि बात का सरकार से कहा चाहित है की जब उत्तर परदेश का तूरी के अलग अलग राज बनवा जात है तव वोहमा अवध कय भी नाव शामिल कराय कय जरुरत है. बिना येह्के विकासवा संभव नाही अहै और आपन ई अवधी एक रसीली, रंगीली व हठीली बोलियों कय विकास न होय पाए. —– राज शुक्ल – अवध (उत्तर प्रदेश)